(1) पत्रकारिता में काम करने वाले कार्यकारों/कर्मचारियों जो प्रशासकीय एवं सुपरवाइजरी स्टाफ में नही आते एवं जिस पर यू0पी0 गर्वमेन्ट एक्ट रूल लागू नही होते तथा औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के अन्तर्गत कर्मचारियों की परिभाषा में आते है का संगठन करना।
(2) सदस्यों में एकता, सेवा भाईचारा और सहयोग की भावना उत्पन्न और उनकी भलाई के उपाय और साधन उत्पन्न करना।
(3) सदस्यों में कर्तव्य-पालन सम्बन्धी अनुशासन एवं उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना तथा उनकी कार्यकुशलता एवं उपयोगिता बढ़ाने का प्रयत्न करना।
(4) सदस्यों में हर प्रकार की दशा सुधारने तथा अच्छी बनाने का प्रयत्न करना और उद्देश्यों को कार्यान्वित करने के लिए ऐसे लाभ की व्यवस्था करना जो यूनियन के कोष एवं प्रस्तुत परिस्थितियों देखते हुए सम्भव हो।
(5) सदस्यों की हर शिकायते दूर करना मालिकों तथा उनके कर्मचारियों के बीच सौहार्द बढ़ाना और आपसी झगड़े यथा-सम्भव शान्तिूपर्ण समझौते से तय कर लेना जिससे काम में अनावश्यक रूकावट न होने पावें।
(6) यूनियन द्वारा स्वीकृत हड़तालो को अहिंसात्मक और शान्तिपूर्ण साधनों द्वारा सुचारू रूप से चलाना और उनकी शीघ्र और सन्तोषजनक समाप्ति के लिए प्रबन्ध करना।
(7) सदस्यो की सुरक्षा के लिए बने कानूनो को कार्यान्वित कराने तथा ऐसे कानूनों को बनवाने का प्रबन्ध करना जिससे श्रमिकों की भलाई हो।
(8) सदस्यो या उनके आश्रितों के लिए शिक्षा सम्बन्धी सामाजिक या धार्मिक सहायताओं की (जिसमें मृत सदस्यों के संस्कारों या धार्मिक कृत्यों सम्बन्धी व्यय की सहायता सम्मिलित है) व्यवस्था करना।
(9) झगड़े के शीघ्र ही निपटारे के लिए प्रान्तीय श्रम कार्यालय/सम्बन्धित सरकारी अधिकारी से सहयोग करना।
(10) सदस्यों के हितो की रक्षा करने एवं उनके लिए हितकारी कार्यो मं वृद्धि करने के लिए दूसरे ऐसे उपाय काम में लेना जो यूनियन के उद्देश्य के विपरीत न हो।
(11) उद्योग अनुशासन सहित तथा श्रम-सम्मेलनों के प्रस्तावों का पालन करना।
(12) अखिल भारतीय टेªड यूनियन संगठनों से सम्बन्ध स्थापित करना।
4- साधारण सदस्यः- विधान के किसी नियम के प्रतिकूल न पड़ने पर कोई भी व्यक्ति जो पत्रकारिता क्षेत्र में काम करता है तथा प्रशासकीय एवं सुपरवाइजरी स्टाफ में नही आता तथा औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के अन्तर्गत कर्मचारियों की परिभाषा में आता है, यूनियन का सदस्य बन सकता है। इसके लिये उसे नियम 7 अन्तर्गत निर्धारित प्रवेश शुल्क अदा कर तथा निर्धारित प्रवेश पत्र महामंत्री के नाम यूनियन के कार्यालय में भेजना होगा।
5- विशिष्ट (आनरेरी सदस्य)ः- उन व्यक्तियों के अतिरिक्त जो धारा-4 में उल्लिखित क्षेत्र में काम करते हो/नियुक्ति हो, कोई भी अन्य व्यक्ति जो यूनियन के उद्देश्यो से सहमत हो और भारतीय व्यवसायिक संघो के ऐक्ट 1926 ई0 की धारा 22 तथा यूनियन इस विधान के आदेशों के अनुसार पदाधिकारी (कार्यकारिणी का सदस्य) नियुक्ति किया गया हो तथा जिसने विधान के नियम 4, 7 एवं 14 का प्रतिपालन कर लिया हो यूनियन के विशिष्ट सदस्यों के रूप में भर्ती कर लिया जायेगा।
6- महामंत्री उन व्यक्तियों जो उपरोक्त नियम 4 की सदस्य योग्यता से स्पष्टतया युक्त है, को स्वीकृति निर्वाचित कार्यकारिणी की अगली बैठक में प्राप्त कर लेगा।
15- चन्दे उस अवधि की समाप्ति के पूर्व देने होगें जिस अवधि के लिए देय हो सिवाय (1) कार्यकारिणी समिति के उस सदस्य के जिसका नाम सदस्यों की सूचना के लिए प्रकाशित अथवा विज्ञप्ति कर दिया हो। या (2) यूनियन के किसी कर्मचारी या (3) ऐसे व्यक्ति के जिसे यूनियन के महामंत्री का ऐसा हस्ताक्षर युक्त अधिकार पत्र प्राप्त है, जो कार्यकारिणी के प्रस्तावनानुसार दिया गया हो अन्य कोई व्यक्ति सदस्यों से चन्दा या अन्य रकम वसूल न कर सकेगा।
16- यूनियन के प्रत्येक ऐसे व्यक्ति को जिसे चन्दा वसूल करने के लिए अधिकृत किया गया हो, एक समय केवल एक रसीद वही, जिसमें प्रतिरूप रसीद पत्र (काउन्टर फाइल) लगे होगे। चन्दा वसूल करने वाले व्यक्ति को प्रत्येक प्राप्त रकम के लिए तत्क्षण एक हस्ताक्षर युक्त रसीद देनी होगी। उसे कम से कम सप्ताह में एक बार सब प्राप्त रकम यूनियन के कार्यालय में कोषाध्यक्ष के पास जमा करनी होगी। कोषाध्यक्ष प्राप्त रकम वही प्रतिरूप रसीद पत्रों से मिलान करके पूरी प्राप्त रकम के लिए मोहर लगी रसीद चन्दा वसूल करने वाले को देगा। यह रसीद चन्दा जमा करने वाले दिन रसीद वही से दी गई अन्तिम रसीद के प्रतिरूप पर चिपका दी जाएगी। नई रसीद वही प्राप्त करने के पहले समाप्त की हुई रसीद वही यूनियन के कार्यालय में जमा कर देना है।
17- चन्दा केवल उसी वही पर वसूल किया जाएगा जो रजिस्ट्रार टेªड यूनियन कार्यालय के पहले से दाखिल की हुई हो यदि नमूना बदल दिया जाय, तो नमूने के रिकार्ड के लिए लिए रजिस्ट्रार टेªड यूनियन के कार्यालय में भेज दी जाय।
10- कोई भी सदस्य जो चन्दा अदा करने की अवधि प्रारम्भ होने से एक माह के अंदर अपना चन्दा अदा नही करता, यूनियन की सदस्यता से स्वयं पृथक समझ लिया जाएगा आदि कार्यकारिणी उचित समझे तो सदस्यों को अधिक से अधिक एक माह की मोहलत दे सकती है यदि उसके बाद भी चन्दा नही दिया जाता तो सदस्यता स्वतः समाप्त हो जायेगी।
11- यूनियन सदस्य सूची में ऐसे व्यक्तियों के नाम हटा देगा जिनकी मृत्यु हो गयी हो या जो धारा 4 व 5 में निर्धारित सदस्यता की योग्यताओं से रहित हो गए हो जिन्हें विधान के किसी अन्य नियम के अनुसार सदस्यता रो हटा दिया हो।
12- कोई व्यक्ति जो यूनियन का सदस्य नही रह जाता तुरन्त सदस्यता से वंचित कर दिया जाएगा और उसे यूनियन के किसी कोष तथा उसके द्वारा संचालित सहायताओं पर कोई अधिकार न रहेगा।
13- कोई भी सदस्य जो निकाल दिया गया हो, या जिसका नाम सदस्य-सूची से उपरोक्त नियम-11 के अधीन हटा दिया गया हो, प्रवेश सम्बन्धी नियमों का पालन करते हुए कार्यकारिणी समिति द्वारा पुनः भर्ती किया जा सकता हैं। यदि पुनः प्रवेश का प्रार्थना पत्र देने की तारीख पर पुनः प्रवेश चाहने वाले व्यक्ति को सदस्यता सूची से हटे एक वर्ष से अधिक हो गया हो, तो प्रवेश शुल्क फिर देना होगा तथा यदि सदस्य अपना चन्दा न देने के कारण निकाला गया हो, तो उसे ऐसी सब रकम, जो उस पर बकाया हो, अदा करनी पड़ेगी।
19- यूनियन का कोषाध्यक्ष समस्त आमदनी और खर्च तथा देने और पावने (जायदाद) का बकाया हिसाब रखेगा।
20- कोषाध्यक्ष के पास नकद 500 से अधिक हो जाने पर वह किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में महामंत्री तथा कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षरों से यूनियन खातों में जमा कर देगा। उक्त एकाउन्ट से रूपया निकालना भी दोनो के संयुक्त हस्ताक्षरों से हो सकेगा।
21- कार्यकारिणी यूनियन का अतिरिक्त कोष महामंत्री तथा कोषाध्यक्ष के संयुक्त नामों से कार्यकारिणी समिति द्वारा स्वीकृति विधि के अनुसार पूॅजी के रूप में लाभार्थ लगा दिया जाएगा।
22- कार्यकारिणी यूनियन के प्रस्तावों के अनुसार ही यूनियन के कोषो तथा अन्य सम्पत्ति का प्रबन्ध करेगें।
उद्देश्य जिन पर साधारण व्यय किया जा सकता है
23- यूनियन का साधारण कोष निम्नलिखित उद्देश्यों के अतिरिक्त किसी अन्य उद्देश्य पर नही व्यय किया जा सकता हैः-
(1) यूनियन के अफसरो, कार्यकारिणी के सदस्यों के यात्रा, कार्यक्रम करने में होने वाले धन खर्च, भत्ता तथा अन्य खर्चो के देने में।
(2) यूनियन के सम्बन्ध में संचालन सम्बन्धी खर्चो के देने में, जिसमें यूनियन के साधारण कोष के हिसाब की जाॅच (आडिट) का खर्च सम्मिलित है।
(3) किसी ऐसी अदालती कार्यवाही की पैरवी करने में जिसमें यूनियन का या कोई उसका सदस्य वादी या प्रतिवादी हो और उस अदालती कार्यवाही का संचालन जो किसी ऐसे हक की प्राप्ति या रक्षा के लिए हो, जिसका प्रश्न किसी सदस्य और उसके मालिक के बीच उठा हो।
(4) यूनियन का उसके किसी सदस्य की ओर से व्यवसायिक झगड़े के सम्बन्ध में पैरवी करने में ।
(5) व्यवसायिक झगड़े से सदस्यों के होने वाली क्षति की पूर्ति में।
(6) सदस्यों की मृत्यु, बुढ़ापा, बीमारी दुर्घटना या बेरोजगारी पर उन्हें या उनके आश्रितों को भत्ता देने में।
(7) सदस्यों के लिए जीवन बीमा पालिसी प्रस्तुत करने में या सदस्यों को जीवन बीमा पालिसियों या उनकी दुर्घटना अथवा बेरोजगार सम्बन्धी बीमा पालिसियों की जिम्मेदारी लेने में।
(8) सदस्यों का उनके आश्रितों के लिए शिक्षा सम्बन्धी सामाजिक या धार्मिक सहायतों को (जिनमें मृत सदस्यों के संस्कारो या धार्मिक कृत्यों सम्बन्धी व्यय की सहायता सम्मिलित है।) व्यवस्था करने में ।
(9) सदस्य से सम्बन्ध रखने वाले प्रश्नों पर विशेष रूप से उनके विचार रखने वाले अखबार, पत्रिका तथा बेव साइड संस्था के नाम संचालन में।
(10) किसी ऐसे कार्य में चंदा देने में जो आमतौर से सदस्यों के हित के लिए और जो उन कारणों को बढ़ाने वाला हो जिस प्रकार यूनियन का साधारण कोष व्यय किया जा सकता हो। यह शर्त हो कि किसी आर्थिक वर्ष में इस प्रकार के चन्दों के व्यय किया जाने वाला धन यूनियन के साधारण कोष की उस वर्ष की उस समय तक की सम्पूर्ण आय और उस वर्ष प्रारम्भ में उस कोष की रोकड़ के जोड़ के एक चैथाई हिस्सा से अधिक न हो।
(11) विज्ञप्ति में उल्लिखित शर्तो को ध्यान में रखते हुए किसी दूसरे ऐसे कार्य में जिसकी उपयुक्त सूचना सरकार अपने बजट को विज्ञप्ति
26- प्रत्येक वर्ष में यूनियन के समस्त सदस्यों की साधारण सभा की कम से कम 1 बैठके तथा कार्यकारिणी समिति की तीन महीने में कम से कम एक बैठक हुआ करेगी।
दोनों प्रकार की सभाओं के नोटिस कम से कम 15 दिन पूर्व लगाना होगा। लेकिन आवश्यक बैठकों पर यह नियम लागू न होगा परन्तुः-
धारा (26) (अ)ः- निम्न प्रकार की बैठकों के लिए जो सूचना प्रसारित होगी वह बैठक की तिथि से कम से कम 15 दिन निगमित पूर्व होनी चाहिए यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इसकी सूचना कार्यकारिणी की सदस्यों को प्राप्त हो गई अथवा प्राप्त करने के लिए यथोचित प्रयास किये जा चुके है।
(1) चुनाव के सम्बन्ध में आम सभा की बैठक।
(2) चुनाव के सम्बन्ध में कार्यकारिणी की बैठक।
(3) सदस्यों की अनुशासनहीनता सम्बन्धी कार्यवाही हेतु बुलाई जाने वाली कार्यकारिणी समिति एवं आम सभा की बैठकें।
नोट – उक्त सम्बन्ध में निकाली गई सूचनायें यूनियन के नोटिस बोर्ड पर लगाई जायेगी और उनके प्रचार को समुचित व्यवस्था करनी होगी सूचनाओं की प्रतियाॅ श्रम कार्यालय तथा रजिस्ट्रार टेªड यूनियन उत्तर प्रदेश कानपुर को भेजना आवश्यक होगा।
27- यूनियन का महामंत्री अध्यक्ष की अनुमति से यूनियन की बैठकें बुलायेगा और उसके समय और स्थान की सूचना सम्बन्धित व्यक्तियों को देगा, लकिन नियम 26 के अन्तर्गत बुलाये जाने वाली सभा में अध्यक्ष की अनुमति आवश्यक न होगी।
28- कम से कम पंचमास सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर युक्त मांग उपस्थिति किये जाने पर महामंत्री साधारण सभा या कार्यकारिणी की जैसा भी उक्त मांग में आवेदन हो अतिरिक्त बैठक 15 दिन के अंदर बुलायेगा। यदि महामंत्री निर्धारित समय से मांग पत्र की नोटिस पाने पर भी मीटिंग नहीं बुलाता तो मांग पत्र के हस्ताक्षरकर्ताओं को स्वयं मीटिंग बुलाने का अधिकार होगा।
29- साधारण सभा से आर्थिक अधिवेशन में आर्थिक वर्ग आन्दोलन तथा पत्रकार के हित सम्बन्धी महत्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार होगा तथा जो नीति निर्धारित की जावेगी जिसका अनुकरण यूनियन करेगी।
30- यूनियन के प्रतिदिन कार्य संचालन व उनके कोष के नियन्त्रण और उसकी नीति के कार्यान्वित करने के लिए एक कार्यकारिणी समिति होगी। समिति यूनियन के उद्देश्यों को कार्यान्वित करने के लिए नियम तथा उपनियम बनाकर उन पर साधारण सभा की स्वीकृति ले सकती है।
31- साधारण सभा के सदस्यों का पंचमास तथा कार्यकारिणी समिति के सदस्यों का तिहाई भाग इनकी बैठकों का कोरम समझा जावेगा।
32- बैठक में उपस्थित प्रत्येक सदस्य का एक वोट होगा, पर किसी विषय पर बराबर वोट होने पर अध्यक्ष का एक अतिरिक्त निर्णायक वोट भी होगा।
33- कार्यकारिणी समिति का कोई सदस्य यदि लगातार तीन बैठक में अनुपस्थित रहेगा तो उसका स्थान यदि वह जेल में या छुट्टी पर नही है रिक्त समझ लिया जायेगा।
34- बैठकों की सूचना महामंत्री द्वारा सदस्यों के पास उनके बताए पतों पर भेजी जायेगी। किसी सदस्य के उपस्थित न होने पर बैठक की सूचना उनके निवास स्थान पर छोड़ी जाएगी या डाक द्वारा पोस्टल सर्टीफिकेट से भेज दी जाएगी।
35- यूनियन की साधारण सभा कार्यकारिणी समिति के लिए पदाधिकारियों को मिलाकर कुल 12 सदस्य निर्वाचित करेगी, जिसमें कम से कम दो तिहाई साधारण सदस्यों में से अवश्य होगे। कार्यकारिणी समिति के लिये सदस्यों की आयु 18 वर्ष से कम न होनी चाहिए। विशिष्ट सदस्य टेªड यूनियन अधिनियम की धारा 22 (2) के अनुसार होगें।
36- कार्यकारिणी समिति के लिए सदस्यों का चुनाव सर्व सम्मति के आधार पर होगा/चुनाव कार्यकारिणी द्वारा बनाए गए चुनाव सम्बन्धी नियमों के अनुसार होगें।
37- चुनाव प्रत्येक तीन वर्ष में जनवरी या फरवरी के महीने में होगे और नई कार्यकारिणी समिति अन्तिम चुनाव के बाद के दिनांक से पदाधिकारी होकर अगले चुनाव के दिनांक तक पदाधिकारी रहेगी।
त्रिवार्षिक चुनाव के पूर्व कार्यकारिणी पदाधिकारियों के रिक्त होने वाले स्थानों की पूर्ति कार्यकारिणी अपने सदस्यों में से स्वयं कर लेेगी तथा कार्यकारिणी के प्रत्येक परिवर्तन की सूचना परिवर्तन की तारीख से 7 दिन के अंदर व्यवसायिक संघो के रजिस्ट्रार को फार्म ‘जे’की दो प्रतियों में दे दी जायेगी।
संरक्षक, अध्यक्ष (1), उपाध्यक्ष (2), महामंत्री (1), कोषाध्यक्ष (1), मंत्री (2)
39- कार्यकारिणी समिति पहली बैठक से विशिष्ठ सदस्यों को नियुक्ति तथा पदाधिकारियों का चुनाव करेगी।
(1) कोई भी पदाधिकारी अपने वर्तमान पद पर दो बार (6 वर्ष) से अधिक वर्तमान पद पर लगातार नही रहेगा।
40- कार्यकारिणी का कोई भी सदस्य अपने पद से त्यागपत्र दे सकता है जो तब तक प्रभाव में न आयेगा। जब तक कार्यकारिणी ने उसे स्वीकृत न कर लिया हो।
41- कोई भी पदाधिकारी अपने पद से कार्यकारिणी समिति के दो तिहाई सदस्यों के बहुमत से हटाया जा सकता है लेकिन ऐसे मामलो में वोट गुप्त बैलेट द्वारा लिए जायेगे। पदाधिकारी को कम से कम 15 दिन का समय अपनी सफाई पेश करने के लिए देना आवश्यक है।
42- संरक्षक यूनियन के वरिष्ठ सदस्यों में से एक बनाया जायेगा जोकि यूनियन में मार्ग दर्शक के रूप में काम करेगा।
43- अध्यक्ष यूनियन के समस्त कार्यो की देखभाल और उनका नियन्त्रण करेगा। यह कार्यकारिणी तथा यूनियन की साधारण सभाओं की अध्यक्षता करेगा और उसकी कार्यवाही संचालन करेगा।
44- उपाध्यक्ष ज्येष्ठानुसार अध्यक्ष के कार्यो में सहायता करेगा और उनकी अनुपस्थिति में उसकी जगह काम करेगा।
45- महामन्त्री यूनियन का सारा कार्य करेगा, यूनियन की तरफ से पत्र व्यवहार करेगा, यूनियन की बैठक की कार्यवाही करेगा, सब बिलो पर हस्ताक्षर करेगा और हिसाब के लिए उत्तरदायी होगा। वह प्रत्येक मास का हिसाब कार्यकारिणी द्वारा पास करा लेगा।
46- मंत्री ज्येष्ठानुसार महामंत्री के कार्यो में सहायता करेगे महामंत्री की अनुपस्थिति में उसकी जगह कार्य करेगे तथा कनिष्ठ मंत्री द्वारा यूनियन का संगठनात्मक कार्य करेगा।
47- कोषाध्यक्ष यूनियन की आय और व्यय का हिसाब, किताब रखेगा और यूनियन का कोष कार्यकारिणी समिति द्वारा राष्ट्रीय कृत किसी बैंक में यूनियन के खाते में महामंत्री के संयुक्त हस्ताक्षरों से रखेगा।
48- अध्यक्ष 1000 रू0 तक और महामंत्री 2000 रू0 तक मासिक खर्च कर सकता है, लेकिन उससे अधिक रकम व्यय करने के लिए कार्यकारिणी समिति की मन्जूरी आवश्यक होगी।
49- विवाद ग्रस्त मामलों में यूनियन पहले खत-किताब तथा पारस्परिक समझौता के तरीकों को सामने लायेगी।
60- यूनियन के विधान संशोधन यूनियन को साधारण सभा में तीन चैथाई सदस्यों के बहुमत से हो सकता है। यह शर्त है कि प्रस्तावित संशोधन पहले कार्यकारिणी द्वारा स्वीकृत किया जा चुका हो और बैठकों के कार्यक्रम में उल्लेख रहा हो। वह भी शर्त है कि निर्णय संधोधन के पक्ष में हो तो कोई सदस्य यह मांग पेश कर सकता है। कि साधारण सभा के इस निर्णय पर रेफरेन्डम वोटों द्वारा आम जनमत ले लिये जाये रेफरेन्डम तभी लिया जायेगा जब रेफरेन्डम लेने के प्रस्ताव के समर्थक बैठकों में उपस्थित सदस्यों में से कम से कम 10 प्रतिशत होगें। इस प्रकार रेफरेन्डम गुप्त वोटों द्वारा प्रस्ताव की तारीख से एक महीने के अन्दर होगा।
नियमों के संशोधन या संशोधन की नोटिस व्यवसायिक संघो के रजिस्ट्रार को साधारण सभा में संशोधन स्वीकृत होने की तारीख से 14 दिन के अन्दर भेज दिया जायेगा। संशोधन उसी समय काम में लाये जायेगे जब कि रजिस्ट्रार ने उन्हें उत्तर प्रदेशीय व्यवसायिक संघो के नियम 1926 ई0 के नियम 12 के अनुसार रजिस्टर कर लिया हो।



